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mahabharat 10.11.16: ऐसा कहकर प्रसिद्ध द्रुपदकुमारी कृष्णा पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के सामने उपवास पर बैठ गईं ॥16॥   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.11.16 
एवमुक् त् वा तत: कृष्णा पाण्डवं प्रत्युपाविशत्।
युधिष्ठिरं याज्ञसेनी धर्मराजं यशस्विनी॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर प्रसिद्ध द्रुपदकुमारी कृष्णा पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर के सामने उपवास पर बैठ गईं ॥16॥
 
Saying this, the famous Drupadakumari Krishna sat on a fast in front of Pandu's son Yudhishthir. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)