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mahabharat 10.11.11: कुन्तीनन्दन! सौभाग्य से तुमने कुशलपूर्वक जीवन बिताया है और मदमस्त स्त्रियों से भरी इस सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य प्राप्त किया है। अब तुम्हें सुभद्रापुत्र अभिमन्यु का स्मरण भी नहीं रहेगा॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 10.11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 11: युधिष्ठिरका शोकमें व्याकुल होना, द्रौपदीका विलाप तथा द्रोणकुमारके वधके लिये आग्रह, भीमसेनका अश्वत्थामाको मारनेके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.11.11 
दिष्टॺा त्वं कुशली पार्थ मत्तमातङ्गगामिनीम्।
अवाप्य पृथिवीं कृत्स्नां सौभद्रं न स्मरिष्यसि॥ ११॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! सौभाग्य से तुमने कुशलपूर्वक जीवन बिताया है और मदमस्त स्त्रियों से भरी इस सम्पूर्ण पृथ्वी का राज्य प्राप्त किया है। अब तुम्हें सुभद्रापुत्र अभिमन्यु का स्मरण भी नहीं रहेगा॥ 11॥
 
Kuntinandana! By good fortune you have lived well and attained the kingdom of this whole earth full of intoxicated women. Now you will not even remember Abhimanyu, the son of Subhadra.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)