श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.1.9 
न दिष्टमभ्यतिक्रान्तुं शक्यं गावल्गणे नरै:।
यत् समेत्य रणे पार्थै: पुत्रो मम निपातित:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे गवलगण! जिस प्रकार कुन्तीपुत्रों ने मिलकर युद्धभूमि में मेरे पुत्र को परास्त किया, उससे यह प्रकट होता है कि कोई भी मनुष्य भगवान के नियमों का उल्लंघन नहीं कर सकता॥9॥
 
O son of Gavalgana! The way the sons of Kunti together defeated my son on the battlefield shows that no human being can violate the laws of God.॥ 9॥
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