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mahabharat 10.1.7: धृतराष्ट्र बोले - संजय! मेरे पुत्र दुर्योधन में दस हज़ार हाथियों का बल था, फिर भी भीमसेन ने उसे मार डाला। उसने जो किया है, उस पर विश्वास करना कठिन है।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.1.7 
धृतराष्ट्र उवाच
अश्रद्धेयमिदं कर्म कृतं भीमेन संजय।
यत् स नागायुतप्राण: पुत्रो मम निपातित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - संजय! मेरे पुत्र दुर्योधन में दस हज़ार हाथियों का बल था, फिर भी भीमसेन ने उसे मार डाला। उसने जो किया है, उस पर विश्वास करना कठिन है।
 
Dhritarashtra said - Sanjay! My son Duryodhan had the strength of ten thousand elephants, yet Bhimasena killed him. What he has done is hard to believe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)