Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.69: यदि मोहवश आप दोनों की बुद्धि नष्ट न हो गई हो, तो इस महान् संकटकाल में हम लोगों को अपना बिगड़ा हुआ काम सुधारने के लिए क्या करना श्रेयस्कर होगा? कृपा करके हमें यह बताइए॥69॥ | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भवतोस्तु यदि प्रज्ञा न मोहादपनीयते।
व्यापन्नेऽस्मिन् महत्यर्थे यन्न: श्रेयस्तदुच्यताम्॥ ६९॥
अनुवाद
यदि मोहवश आप दोनों की बुद्धि नष्ट न हो गई हो, तो इस महान् संकटकाल में हम लोगों को अपना बिगड़ा हुआ काम सुधारने के लिए क्या करना श्रेयस्कर होगा? कृपा करके हमें यह बताइए॥69॥
If the wisdom of both of you has not been destroyed by delusion, then in this time of great crisis, what would be the best thing for us to do to set right our spoilt work? Please tell us this.'॥ 69॥
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि द्रौणिमन्त्रणायां प्रथमोऽध्याय:॥ १॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें अश्वत्थामाकी मन्त्रणाविषयक पहला अध्याय पूरा हुआ॥ १॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥