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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना
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श्लोक 68
श्लोक
10.1.68
एवमेतेन भाव्यं हि नूनं कार्येण तत्त्वत:।
यथा ह्यस्येदृशी निष्ठा कृतकार्येऽपि दुष्करे॥ ६८॥
अनुवाद
निश्चय ही इस कार्य का यही परिणाम होना था। हमने बहुत कठिन कार्य किया, फिर भी इस युद्ध का अंतिम परिणाम इस रूप में सामने आया।' 68.
‘Surely this action was going to have the same result. We did a very difficult task, yet the final result of this war appeared in this form. 68.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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