vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना
»
श्लोक 66
श्लोक
10.1.66
पाण्डवैर्धार्तराष्ट्राणां यदिदं कदनं कृतम्।
वयमेव त्रय: शिष्टा अस्मिन् महति वैशसे॥ ६६॥
अनुवाद
हाय! पांडवों ने धृतराष्ट्र के पुत्रों और सैनिकों का नाश कर दिया। इस महासंहार में केवल हम तीन ही जीवित बचे हैं।
Alas! The Pandavas have destroyed the sons and soldiers of Dhritarashtra. Only three of us have survived this great carnage.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×