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mahabharat 10.1.66: हाय! पांडवों ने धृतराष्ट्र के पुत्रों और सैनिकों का नाश कर दिया। इस महासंहार में केवल हम तीन ही जीवित बचे हैं।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  10.1.66 
पाण्डवैर्धार्तराष्ट्राणां यदिदं कदनं कृतम्।
वयमेव त्रय: शिष्टा अस्मिन् महति वैशसे॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
हाय! पांडवों ने धृतराष्ट्र के पुत्रों और सैनिकों का नाश कर दिया। इस महासंहार में केवल हम तीन ही जीवित बचे हैं।
 
Alas! The Pandavas have destroyed the sons and soldiers of Dhritarashtra. Only three of us have survived this great carnage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)