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mahabharat 10.1.64: घोड़ों की हिनहिनाहट और हाथियों के टापने की ध्वनि के साथ-साथ वीर योद्धाओं की महान गर्जना भी सुनाई दे रही है।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  10.1.64 
अश्वानां हेषमाणानां गजानां चैव बृंहताम्।
सिंहनादश्च शूराणां श्रूयते सुमहानयम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
घोड़ों की हिनहिनाहट और हाथियों के टापने की ध्वनि के साथ-साथ वीर योद्धाओं की महान गर्जना भी सुनाई दे रही है।
 
‘Along with the sound of neighing horses and trumpeting elephants, the great roar of the valiant warriors can be heard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)