vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना
»
श्लोक 64
श्लोक
10.1.64
अश्वानां हेषमाणानां गजानां चैव बृंहताम्।
सिंहनादश्च शूराणां श्रूयते सुमहानयम्॥ ६४॥
अनुवाद
घोड़ों की हिनहिनाहट और हाथियों के टापने की ध्वनि के साथ-साथ वीर योद्धाओं की महान गर्जना भी सुनाई दे रही है।
‘Along with the sound of neighing horses and trumpeting elephants, the great roar of the valiant warriors can be heard.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×