Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.63: नाना प्रकार के वाद्यों की गम्भीर और भयंकर ध्वनि, वायु से चलने वाले शंखों की ध्वनि के साथ मिलकर, सम्पूर्ण दिशाओं में व्याप्त हो जाती है॥ 63॥ | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नाना प्रकार के वाद्यों की गम्भीर और भयंकर ध्वनि, वायु से चलने वाले शंखों की ध्वनि के साथ मिलकर, सम्पूर्ण दिशाओं में व्याप्त हो जाती है॥ 63॥
‘The deep and fearful sound of various musical instruments mixed with the sound of the conch shells, driven by the wind, seems to fill all directions.॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥