श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  10.1.62 
विनर्दन्ति च पञ्चाला: क्ष्वेलन्ति च हसन्ति च।
धमन्ति शङ्खान् शतशो हृष्टा घ्नन्ति च दुन्दुभीन्॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
पांचालययोद्धा हर्ष से भरकर गर्जना करते हैं, जयजयकार करते हैं, हंसते हैं, सैकड़ों शंख बजाते हैं और तुरहियां बजाते हैं।
 
‘The Panchalayaoddhas, filled with joy, roar, shout, laugh, blow hundreds of conches and beat their trumpets.
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