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mahabharat 10.1.61: नीच भीमसेन ने एक मुकुटधारी सम्राट के सिर पर लात मारकर अत्यंत क्रूर कार्य किया है।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  10.1.61 
वृकोदरेण क्षुद्रेण सुनृशंसमिदं कृतम्।
मूर्धाभिषिक्तस्य शिर: पादेन परिमृद्नता॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
नीच भीमसेन ने एक मुकुटधारी सम्राट के सिर पर लात मारकर अत्यंत क्रूर कार्य किया है।
 
The vile Bhimasena has committed a most cruel act by kicking the head of a crowned emperor.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)