Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.60: राजा दुर्योधन, जो कभी ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओं का सेनापति था, विशुद्ध वीरता प्रदर्शित करते हुए अकेले युद्ध कर रहा था; किन्तु अनेक दुष्टों ने मिलकर उसे युद्धभूमि में भीमसेन के हाथों पराजित करवा दिया। | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा दुर्योधन, जो कभी ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओं का सेनापति था, विशुद्ध वीरता प्रदर्शित करते हुए अकेले युद्ध कर रहा था; किन्तु अनेक दुष्टों ने मिलकर उसे युद्धभूमि में भीमसेन के हाथों पराजित करवा दिया।
King Duryodhana, who once commanded eleven Akshauhini armies, was fighting alone, displaying pure valour; but a number of wicked men joined together and got him defeated on the battlefield by Bhimasena.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥