Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.58-59: तब अश्वत्थामा दो घड़ी तक विचारमग्न रहा और अश्रुपूरित स्वर में बोला, 'संसार का सबसे अद्वितीय और पराक्रमी राजा दुर्योधन, जिसके लिए हमने पाण्डवों से शत्रुता रखी थी, मारा गया है।' 58-59 | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मुहूर्तमिव ध्यात्वा बाष्पविह्वलमब्रवीत्॥ ५८॥
हतो दुर्योधनो राजा एकवीरो महाबल:।
यस्यार्थे वैरमस्माभिरासक्तं पाण्डवै: सह॥ ५९॥
अनुवाद
तब अश्वत्थामा दो घड़ी तक विचारमग्न रहा और अश्रुपूरित स्वर में बोला, 'संसार का सबसे अद्वितीय और पराक्रमी राजा दुर्योधन, जिसके लिए हमने पाण्डवों से शत्रुता रखी थी, मारा गया है।' 58-59
Then Ashvatthama remained engrossed in thought for two hours and spoke in a tear-filled voice, 'The world's most unique and powerful king Duryodhana, for whom we had maintained enmity with the Pandavas, has been killed. 58-59
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥