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mahabharat 10.1.57-58h: जब महाबुद्धिमान एवं पराक्रमी कृपाचार्य और कृतवर्मा की नींद खुली और उन्होंने अश्वत्थामा के निश्चय के बारे में सुना, तो वे लज्जित हो गये और कोई उचित उत्तर न सोच सके।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  10.1.57-58h 
तौ प्रबुद्धौ महात्मानौ कृपभोजौ महाबलौ॥ ५७॥
नोत्तरं प्रतिपद्येतां तत्र युक्तं ह्रिया वृतौ।
 
 
अनुवाद
जब महाबुद्धिमान एवं पराक्रमी कृपाचार्य और कृतवर्मा की नींद खुली और उन्होंने अश्वत्थामा के निश्चय के बारे में सुना, तो वे लज्जित हो गये और कोई उचित उत्तर न सोच सके।
 
When the great-minded and mighty Krupacharya and Kritavarman woke up and heard of Ashwatthama's resolve, they were filled with shame and could not think of an appropriate reply. 57 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)