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mahabharat 10.1.56-57h: क्रूर बुद्धि का सहारा लेकर बार-बार उपर्युक्त निर्णय करके अश्वत्थामा ने सोते हुए अपने मामा कृपाचार्य तथा भोजवंशी कृतवर्मा को भी जगा दिया।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  10.1.56-57h 
स क्रूरां मतिमास्थाय विनिश्चित्य मुहुर्मुहु:॥ ५६॥
सुप्तौ प्राबोधयत् तौ तु मातुलं भोजमेव च।
 
 
अनुवाद
क्रूर बुद्धि का सहारा लेकर बार-बार उपर्युक्त निर्णय करके अश्वत्थामा ने सोते हुए अपने मामा कृपाचार्य तथा भोजवंशी कृतवर्मा को भी जगा दिया।
 
Having made the above-mentioned decision repeatedly by resorting to cruel intellect, Ashvatthama woke up his maternal uncle Kripacharya and also Kritavarma of the Bhoja dynasty who were sleeping.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)