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mahabharat 10.1.55-56h: ऐसा विचार करके वीर द्रोणपुत्र ने रात्रि में सोते हुए पांचालों सहित पाण्डवों को मार डालने का निश्चय किया।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 55-56h
 
 
श्लोक  10.1.55-56h 
इत्येवं निश्चयं चक्रे सुप्तानां निशि मारणे॥ ५५॥
पाण्डूनां सह पञ्चालैर्द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
 
 
अनुवाद
ऐसा विचार करके वीर द्रोणपुत्र ने रात्रि में सोते हुए पांचालों सहित पाण्डवों को मार डालने का निश्चय किया।
 
Thinking thus, the valiant son of Drona decided to kill the Pandavas along with the Panchalas while they were sleeping at night. 55 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)