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mahabharat 10.1.54-55h: जो सेना आधी रात को नींद में अचेत पड़ी हो, जिसका नेता नष्ट हो गया हो, जिसके योद्धा विभाजित हो गए हों और जो दुविधा में हो, उस पर भी शत्रु को आक्रमण करना ही चाहिए।’ ॥54 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 54-55h
 
 
श्लोक  10.1.54-55h 
निद्रार्तमर्धरात्रे च तथा नष्टप्रणायकम्॥ ५४॥
भिन्नयोधं बलं यच्च द्विधा युक्तं च यद् भवेत्।
 
 
अनुवाद
जो सेना आधी रात को नींद में अचेत पड़ी हो, जिसका नेता नष्ट हो गया हो, जिसके योद्धा विभाजित हो गए हों और जो दुविधा में हो, उस पर भी शत्रु को आक्रमण करना ही चाहिए।’ ॥54 1/2॥
 
An army which is lying unconscious in sleep at midnight, whose leader has been destroyed, whose warriors are divided and who is in a dilemma, must also be attacked by the enemy.' ॥ 54 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)