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mahabharat 10.1.5-6: दो घण्टे के भीतर ही वे महाधनुर्धर क्रोध और क्षोभ से व्याकुल होकर उस स्थान से कुछ दूर चले गए और प्यास से व्याकुल हो गए। उनके घोड़े भी थक गए। यह स्थिति उनके लिए असहनीय हो गई थी। राजा दुर्योधन की मृत्यु से वे अत्यंत दुःखी हुए और क्षण भर वहीं मौन खड़े रहे।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  10.1.5-6 
ते मुहूर्तात् ततो गत्वा श्रान्तवाहा: पिपासिता:॥ ५॥
नामृष्यन्त महेष्वासा: क्रोधामर्षवशं गता:।
राज्ञो वधेन संतप्ता मुहूर्तं समवस्थिता:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
दो घण्टे के भीतर ही वे महाधनुर्धर क्रोध और क्षोभ से व्याकुल होकर उस स्थान से कुछ दूर चले गए और प्यास से व्याकुल हो गए। उनके घोड़े भी थक गए। यह स्थिति उनके लिए असहनीय हो गई थी। राजा दुर्योधन की मृत्यु से वे अत्यंत दुःखी हुए और क्षण भर वहीं मौन खड़े रहे।
 
Within two hours, those great archers, overcome by anger and resentment, went some distance from that place and became thirsty. Their horses also got tired. This situation had become unbearable for them. They were very sad at the death of King Duryodhana and stood there silently for a moment. 5-6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)