Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.49-50h: यदि मैं छल-कपट का प्रयोग करूँ, तो मेरी अभीष्ट इच्छा अवश्य पूरी हो सकती है। तभी शत्रुओं का महाविनाश संभव होगा। ऐसी विधि अपनाने की अपेक्षा, जिसमें सफलता मिलने में संदेह हो, ऐसी विधि अपनाना अधिक श्रेयस्कर है, जिसमें संदेह के लिए कोई स्थान न हो। सामान्य लोग और विद्वान् इसका अधिक सम्मान करते हैं। | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
छद्मना च भवेत् सिद्धि: शत्रूणां च क्षयो महान्।
तत्र संशयितादर्थाद् योऽर्थो नि:संशयो भवेत्॥ ४९॥
तं जना बहु मन्यन्ते ये च शास्त्रविशारदा:।
अनुवाद
यदि मैं छल-कपट का प्रयोग करूँ, तो मेरी अभीष्ट इच्छा अवश्य पूरी हो सकती है। तभी शत्रुओं का महाविनाश संभव होगा। ऐसी विधि अपनाने की अपेक्षा, जिसमें सफलता मिलने में संदेह हो, ऐसी विधि अपनाना अधिक श्रेयस्कर है, जिसमें संदेह के लिए कोई स्थान न हो। सामान्य लोग और विद्वान् इसका अधिक सम्मान करते हैं।
If I use deceit, then my desired wish can certainly be achieved. Only then will the great destruction of enemies be possible. Instead of resorting to a method where there is doubt in achieving success, it is better to adopt a method in which there is no room for doubt. Ordinary people and scholars respect it more.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥