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mahabharat 10.1.45-46h: इस चिड़िया ने मुझे सिखाया है कि युद्ध में क्या करना चाहिए। मुझे लगता है कि यही समय है जब मुझे अपने दुश्मनों को मार गिराना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  10.1.45-46h 
उपदेश: कृतोऽनेन पक्षिणा मम संयुगे॥ ४५॥
शत्रूणां क्षपणे युक्त: प्राप्त: कालश्च मे मत:।
 
 
अनुवाद
इस चिड़िया ने मुझे सिखाया है कि युद्ध में क्या करना चाहिए। मुझे लगता है कि यही समय है जब मुझे अपने दुश्मनों को मार गिराना चाहिए।
 
This bird has taught me what should be done in war. I think that this is the time for me to kill my enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)