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mahabharat 10.1.44-45h: रात्रि में उल्लू द्वारा किया गया वह विश्वासघाती और क्रूर कृत्य देखकर अश्वत्थामा ने स्वयं भी वैसा ही करने का निश्चय किया और एकान्त में विचार करने लगा -॥44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  10.1.44-45h 
तद् दृष्ट्वा सोपधं कर्म कौशिकेन कृतं निशि॥ ४४॥
तद्भावकृतसंकल्पो द्रौणिरेकोऽन्वचिन्तयत्।
 
 
अनुवाद
रात्रि में उल्लू द्वारा किया गया वह विश्वासघाती और क्रूर कृत्य देखकर अश्वत्थामा ने स्वयं भी वैसा ही करने का निश्चय किया और एकान्त में विचार करने लगा -॥44 1/2॥
 
Having seen the treacherous and cruel act committed by the owl in the night, Ashvatthama himself resolved to do the same and began to think alone -॥ 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)