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mahabharat 10.1.41: अपने पंजों को हथियार बनाकर उसने कुछ कौवों के पंख नोच लिए, कुछ के सिर काट दिए और कुछ के पैर तोड़ दिए।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.1.41 
केषांचिदच्छिनत् पक्षान् शिरांसि च चकर्त ह।
चरणांश्चैव केषांचिद् बभञ्ज चरणायुध:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
अपने पंजों को हथियार बनाकर उसने कुछ कौवों के पंख नोच लिए, कुछ के सिर काट दिए और कुछ के पैर तोड़ दिए।
 
Using his claws as weapons, he plucked the feathers of some crows, cut off the heads of some and broke the legs of some others.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)