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mahabharat 10.1.40: वह पक्षी, जो कौओं के लिए मृत्युरूप था, बड़े जोर से बरगद की शाखा पर टूट पड़ा और बहुत से सोते हुए कौओं को मार डाला।40.   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.1.40 
संनिपत्य तु शाखायां न्यग्रोधस्य विहङ्गम:।
सुप्ताञ्जघान सुबहून् वायसान् वायसान्तक:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
वह पक्षी, जो कौओं के लिए मृत्युरूप था, बड़े जोर से बरगद की शाखा पर टूट पड़ा और बहुत से सोते हुए कौओं को मार डाला।40.
 
That bird, who was in the form of death for the crows, attacked the branch of the Banyan tree with great force and killed many sleeping crows. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)