vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना
»
श्लोक 40
श्लोक
10.1.40
संनिपत्य तु शाखायां न्यग्रोधस्य विहङ्गम:।
सुप्ताञ्जघान सुबहून् वायसान् वायसान्तक:॥ ४०॥
अनुवाद
वह पक्षी, जो कौओं के लिए मृत्युरूप था, बड़े जोर से बरगद की शाखा पर टूट पड़ा और बहुत से सोते हुए कौओं को मार डाला।40.
That bird, who was in the form of death for the crows, attacked the branch of the Banyan tree with great force and killed many sleeping crows. 40.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas