Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.4-5h: वह पांडवों की चिंता करते हुए लंबी-लंबी गर्म साँसें लेने लगा। इसी बीच विजयी पांडवों की भयंकर गर्जना सुनकर उसे भय हुआ कि कहीं पांडव उसका पीछा न करने लगें; इसलिए उसने पुनः घोड़ों को रथ में जोता और पूर्व दिशा की ओर भाग गया। | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दीर्घमुष्णं च नि:श्वस्य पाण्डवानेव चिन्तयन्।
श्रुत्वा च निनदं घोरं पाण्डवानां जयैषिणाम्॥ ४॥
अनुसारभयाद् भीता: प्राङ्मुखा: प्राद्रवन् पुन:।
अनुवाद
वह पांडवों की चिंता करते हुए लंबी-लंबी गर्म साँसें लेने लगा। इसी बीच विजयी पांडवों की भयंकर गर्जना सुनकर उसे भय हुआ कि कहीं पांडव उसका पीछा न करने लगें; इसलिए उसने पुनः घोड़ों को रथ में जोता और पूर्व दिशा की ओर भाग गया।
He started worrying about the Pandavas, taking long hot breaths. Meanwhile, hearing the fierce roar of the victorious Pandavas, he feared that the Pandavas might start chasing him; so he again harnessed the horses to the chariot and fled towards the east. 4 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥