vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना
»
श्लोक 34
श्लोक
10.1.34
न लेभे स तु निद्रां वै दह्यमानो हि मन्युना।
वीक्षाञ्चक्रे महाबाहुस्तद् वनं घोरदर्शनम्॥ ३४॥
अनुवाद
क्रोध से जलते हुए वह महाबली योद्धा बार-बार उस भयानक वन की ओर देखता रहा।
Burning with anger, he could not sleep. That mighty warrior looked again and again at the terrifying looking forest. 34.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×