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mahabharat 10.1.27: रात्रि में विचरण करने वाले प्राणी अत्यन्त भयंकर शब्द करने लगे। मांसाहारी प्राणी प्रसन्न हो गए और वह भयंकर रात्रि सर्वत्र फैल गई॥27॥   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  10.1.27 
रात्रिंचराणां सत्त्वानां निर्घोषोऽभूत् सुदारुण:।
क्रव्यादाश्च प्रमुदिता घोरा प्राप्ता च शर्वरी॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रात्रि में विचरण करने वाले प्राणी अत्यन्त भयंकर शब्द करने लगे। मांसाहारी प्राणी प्रसन्न हो गए और वह भयंकर रात्रि सर्वत्र फैल गई॥27॥
 
The creatures roaming around in the night started making very terrifying sounds. The carnivorous creatures became happy and that terrifying night spread everywhere.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)