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mahabharat 10.1.26: रात्रि में विचरण करने वाले प्राणी अपनी इच्छा के अनुसार उछलने-कूदने लगे और दिन में विचरण करने वाले प्राणी सो गए ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.1.26 
इच्छया ते प्रवल्गन्ति ये सत्त्वा रात्रिचारिण:।
दिवाचराश्च ये सत्त्वास्ते निद्रावशमागता:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
रात्रि में विचरण करने वाले प्राणी अपनी इच्छा के अनुसार उछलने-कूदने लगे और दिन में विचरण करने वाले प्राणी सो गए ॥26॥
 
The creatures that moved about at night began to jump about according to their will, and the animals that moved about during the day fell asleep. ॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)