Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.1.23: अपने रथों से उतरने के बाद, उन तीनों ने अपने घोड़ों को खोला, स्नान किया और फिर शाम की प्रार्थना की।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.1.23 
तेऽवतीर्य रथेभ्यश्च विप्रमुच्य च वाजिन:।
उपस्पृश्य यथान्यायं संध्यामन्वासत प्रभो॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अपने रथों से उतरने के बाद, उन तीनों ने अपने घोड़ों को खोला, स्नान किया और फिर शाम की प्रार्थना की।
 
After alighting from their chariots, the three of them untied their horses, took their proper baths and then performed the evening prayers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)