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mahabharat 10.1.21: उस भयानक वन में प्रवेश करके चारों ओर देखने पर उसे हजारों शाखाओं से ढका एक बरगद का वृक्ष दिखाई दिया।   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.1.21 
प्रविश्य तद् वनं घोरं वीक्षमाणा: समन्तत:।
शाखासहस्रसंछन्नं न्यग्रोधं ददृशुस्तत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस भयानक वन में प्रवेश करके चारों ओर देखने पर उसे हजारों शाखाओं से ढका एक बरगद का वृक्ष दिखाई दिया।
 
Entering that dreadful forest and looking around he saw a banyan tree covered with thousands of branches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)