श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  10.1.20 
नानातोयै: समाकीर्णं नानापुष्पोपशोभितम्।
पद्मिनीशतसंछन्नं नीलोत्पलसमायुतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जगह-जगह अनेक प्रकार के जलस्रोत थे, अनेक प्रकार के पुष्प उस वन की शोभा बढ़ा रहे थे, वहाँ के जलस्रोतों में सैकड़ों लाल कमल और असंख्य नीले कमल चारों ओर फैले हुए थे।
 
There were many kinds of water bodies here and there, many kinds of flowers were enhancing the beauty of that forest, hundreds of red lotuses and innumerable blue lotuses were spread all around in the water bodies there.
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