Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.1.18-19: वहाँ कुछ देर रुकने के बाद उन्होंने अपने उत्तम घोड़ों को पानी पिलाया और सूर्यास्त होते-होते वे उस विशाल वन में पहुँच गये जहाँ अनेक प्रकार के मृग और पक्षी रहते थे, अनेक प्रकार के वृक्ष और लताएँ उस वन को ढँके हुए थीं और उसमें अनेक प्रकार के साँप रहते थे। | mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वहाँ कुछ देर रुकने के बाद उन्होंने अपने उत्तम घोड़ों को पानी पिलाया और सूर्यास्त होते-होते वे उस विशाल वन में पहुँच गये जहाँ अनेक प्रकार के मृग और पक्षी रहते थे, अनेक प्रकार के वृक्ष और लताएँ उस वन को ढँके हुए थीं और उसमें अनेक प्रकार के साँप रहते थे।
After staying there for a while, they gave water to their excellent horses and by the time the sun set, they reached that huge forest where several kinds of deer and birds lived, various kinds of trees and creepers covered the forest and several kinds of snakes lived in it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥