श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.1.15 
कृतं सत्यं वचस्तस्य विदुरस्य महात्मन:।
अकुर्वता वचस्तेन मम पुत्रेण संजय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
संजय! मेरे पुत्र ने मेरी बात न मानकर महात्मा विदुर के वचनों को सत्य सिद्ध कर दिया॥15॥
 
Sanjay! My son did not listen to me and proved the words of Mahatma Vidur to be true. ॥ 15॥
 ✨ ai-generated