Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.1.14: अहा! जिन भीमसेन ने अकेले ही मेरे सौ पुत्रों को मार डाला, उनके वचन मैं कैसे सुन सकूँगा?॥14॥   |   mahabharat अध्याय 10.1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.1.14 
कथं भीमस्य वाक्यानि श्रोतुं शक्ष्यामि संजय।
येन पुत्रशतं पूर्णमेकेन निहतं मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अहा! जिन भीमसेन ने अकेले ही मेरे सौ पुत्रों को मार डाला, उनके वचन मैं कैसे सुन सकूँगा?॥14॥
 
Oh! How will I be able to listen to the words of Bhimasena who single-handedly killed all my hundred sons?॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)