कथं राज्ञ: पिता भूत्वा स्वयं राजा च संजय।
प्रेष्यभूत: प्रवर्तेयं पाण्डवेयस्य शासनात्॥ १२॥
अनुवाद
संजय! मैं राजा का पिता था और स्वयं भी राजा था। अब मैं पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर की आज्ञा से दास बनकर कैसे रह सकता हूँ?॥12॥
Sanjaya! I was the father of the king and I was also a king myself. Now how can I live like a slave under the orders of Yudhishthira, son of Pandu?॥12॥