श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 1: तीनों महारथियोंका एक वनमें विश्राम, कौओंपर उल्लूका आक्रमण देख अश्वत्थामाके मनमें क्रूर संकल्पका उदय तथा अपने दोनों साथियोंसे उसका सलाह पूछना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.1.12 
कथं राज्ञ: पिता भूत्वा स्वयं राजा च संजय।
प्रेष्यभूत: प्रवर्तेयं पाण्डवेयस्य शासनात्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
संजय! मैं राजा का पिता था और स्वयं भी राजा था। अब मैं पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर की आज्ञा से दास बनकर कैसे रह सकता हूँ?॥12॥
 
Sanjaya! I was the father of the king and I was also a king myself. Now how can I live like a slave under the orders of Yudhishthira, son of Pandu?॥12॥
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