श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.99.49 
महाभाग्यं च नृपतेर्भारतस्य महात्मन:।
यस्येतिहासो द्युतिमान् महाभारतमुच्यते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
मैं उस भरतवंशी महात्मा राजा के महान सौभाग्य का भी वर्णन करूँगा, जिसका उज्ज्वल इतिहास 'महाभारत' नाम से प्रसिद्ध है ॥49॥
 
I will also describe the great fortune of that Mahatma King of Bharatvanshi, whose bright history is famous by the name 'Mahabharata'. 49॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि आपवोपाख्याने नवनवतितमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें आपवोपाख्यानविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ५१ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)