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mahabharat 1.99.48: इस बीच, शोक से व्याकुल शान्तनु पुनः अपने नगर को लौट आये। मैं आगे चलकर शान्तनु के उत्तम गुणों का वर्णन करूँगा॥48॥   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.99.48 
शान्तनुश्चापि शोकार्तो जगाम स्वपुरं तत:।
तस्याहं कीर्तयिष्यामि शान्तनोरधिकान् गुणान्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इस बीच, शोक से व्याकुल शान्तनु पुनः अपने नगर को लौट आये। मैं आगे चलकर शान्तनु के उत्तम गुणों का वर्णन करूँगा॥48॥
 
Meanwhile, Shantanu, overcome with grief, returned to his city again. I will describe the best qualities of Shantanu later. 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)