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mahabharat 1.99.47: उस बालक का नाम देवव्रत रखा गया। कुछ लोग उसे गांगेय भी कहते थे। द्यु* नामक वसु शान्तनु का पुत्र हुआ और गुणों में उससे बढ़कर था। 47.   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.99.47 
स तु देवव्रतो नाम गाङ्गेय इति चाभवत्।
द्युनामा शान्तनो: पुत्र: शान्तनोरधिको गुणै:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
उस बालक का नाम देवव्रत रखा गया। कुछ लोग उसे गांगेय भी कहते थे। द्यु* नामक वसु शान्तनु का पुत्र हुआ और गुणों में उससे बढ़कर था। 47.
 
That boy was named Devavrata. Some people also called him Gangaya. Vasu named Dyu* became the son of Shantanu and surpassed him in qualities. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)