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mahabharat 1.99.44: राजशिरोमणे! इस प्रकार मैंने उन शापित वसुओं को इस मनुष्य लोक से मुक्त करने का भरसक प्रयत्न किया है ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 1.99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.99.44 
एवं तेषामहं सम्यक् शप्तानां राजसत्तम।
मोक्षार्थं मानुषाल्लोकाद् यथावत् कृतवत्यहम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
राजशिरोमणे! इस प्रकार मैंने उन शापित वसुओं को इस मनुष्य लोक से मुक्त करने का भरसक प्रयत्न किया है ॥44॥
 
Rajshiromane! In this way, I have tried my best to free those cursed Vasus from this human world. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)