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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा
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श्लोक 40
श्लोक
1.99.40
नानृतं तच्चिकीर्षामि क्रुद्धो युष्मान् यदब्रुवम्।
न प्रजास्यति चाप्येष मानुषेषु महामना:॥ ४०॥
अनुवाद
‘मैंने क्रोध में आकर जो कुछ तुमसे कहा है, उसे मैं मिथ्या नहीं करना चाहता। ये महाबुद्धिमान लोग मनुष्य लोक में सन्तान उत्पन्न नहीं करेंगे ॥40॥
‘Whatever I have said to you in anger, I do not want to make it false. These great-minded people will not produce children in the human world. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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