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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 99: महर्षि वसिष्ठद्वारा वसुओंको शाप प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.99.38 
उवाच च स धर्मात्मा शप्ता यूयं धरादय:।
अनुसंवत्सरात् सर्वे शापमोक्षमवाप्स्यथ॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
उस समय धर्मात्मा वसिष्ठ ने उनसे कहा, 'मैंने धर सहित समस्त वसुओं को शाप दे दिया है; किन्तु तुम सब लोग प्रतिवर्ष एक-एक करके इन शापों से मुक्त हो जाओगे।
 
At that time the virtuous Vasishtha said to them, 'I have cursed all the Vasus including Dhar; but you all will be freed from all the curses one by one every year.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)