Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.98.4: हे पृथ्वीदेव! यदि आप ऐसा ही आचरण करेंगे, तभी मैं आपके समीप रह पाऊँगा। यदि आप मुझे कभी कोई कार्य करने से रोकेंगे या अप्रिय वचन कहेंगे, तो मैं आपको अवश्य त्याग दूँगा।॥4॥ | mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं हि वर्तमानेऽहं त्वयि वत्स्यामि पार्थिव।
वारिता विप्रियं चोक्ता त्यजेयं त्वामसंशयम्॥ ४॥
अनुवाद
हे पृथ्वीदेव! यदि आप ऐसा ही आचरण करेंगे, तभी मैं आपके समीप रह पाऊँगा। यदि आप मुझे कभी कोई कार्य करने से रोकेंगे या अप्रिय वचन कहेंगे, तो मैं आपको अवश्य त्याग दूँगा।॥4॥
‘Lord Earth! Only if you behave like this will I remain near you. If you ever stop me from doing any work or say unpleasant words to me, I will definitely leave you.'॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥