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mahabharat 1.98.24: यह बालक प्रत्येक वसुओं के अंश का निवास है - यह समस्त वसुओं के अंश से उत्पन्न हुआ है। मैंने तुम्हारे लिए वसुओं से प्रार्थना की थी कि 'राजा का एक पुत्र जीवित रहे'। इसे मेरा बालक समझो और इसका नाम 'गंगदत्त' रखो॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.98.24 
एष पर्यायवासो मे वसूनां संनिधौ कृत:।
मत्प्रसूतिं विजानीहि गङ्गादत्तमिमं सुतम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यह बालक प्रत्येक वसुओं के अंश का निवास है - यह समस्त वसुओं के अंश से उत्पन्न हुआ है। मैंने तुम्हारे लिए वसुओं से प्रार्थना की थी कि 'राजा का एक पुत्र जीवित रहे'। इसे मेरा बालक समझो और इसका नाम 'गंगदत्त' रखो॥ 24॥
 
This child is the abode of a part of each of the Vasus - he has been born from the parts of all the Vasus. I had prayed to the Vasus for you that 'one son of the king should survive'. Consider him as my child and name him 'Gangadatta'.॥ 24॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि भीष्मोत्पत्तावष्टनवतितमोऽध्याय:॥ ९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें भीष्मोत्पत्तिविषयक अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल २८ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)