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mahabharat 1.98.18: मैं जह्नु की पुत्री और महर्षियों द्वारा सेवित गंगा हूँ। मैं देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए आपके पास रह रही थी॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.98.18 
अहं गङ्गा जह्नुसुता महर्षिगणसेविता।
देवकार्यार्थसिद्धॺर्थमुषिताहं त्वया सह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मैं जह्नु की पुत्री और महर्षियों द्वारा सेवित गंगा हूँ। मैं देवताओं का कार्य सिद्ध करने के लिए आपके पास रह रही थी॥18॥
 
I am Ganga, the daughter of Jahnu and served by great sages. I was staying with you to accomplish the tasks of the gods.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)