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mahabharat 1.98.12: अपनी इच्छानुसार उसके साथ प्रेम का आनंद लेते हुए महाराज शान्तनु ने उसके गर्भ से देवताओं के समान तेजस्वी आठ पुत्र उत्पन्न किए॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 98: शान्तनु और गंगाका कुछ शर्तोंके साथ सम्बन्ध, वसुओंका जन्म और शापसे उद्धार तथा भीष्मकी उत्पत्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.98.12 
रममाणस्तया सार्धं यथाकामं नरेश्वर:।
अष्टावजनयत् पुत्रांस्तस्याममरसंनिभान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अपनी इच्छानुसार उसके साथ प्रेम का आनंद लेते हुए महाराज शान्तनु ने उसके गर्भ से देवताओं के समान तेजस्वी आठ पुत्र उत्पन्न किए॥12॥
 
Enjoying his love with her as per his wish, Maharaja Shantanu produced from her womb eight sons, all as illustrious as the gods.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)