Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.97.d5-d6: तत्पश्चात, बड़े होकर राजकुमार शांतनु प्रजा की रक्षा करने लगे। वे धर्माचार्यों में श्रेष्ठ थे। धनुर्वेद में उत्कृष्ट प्रवीणता प्राप्त कर उन्होंने वेदों के अध्ययन में उच्च स्थान प्राप्त किया। वक्ताओं में श्रेष्ठ, वे राजकुमार धीरे-धीरे युवावस्था में पहुँचे। | mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: संवर्धितो राजा शान्तनुर्लोकपालक:।
स तु लेभे परां निष्ठां प्राप्य धर्मविदां वर:॥
धनुर्वेदे च वेदे च गतिं स परमां गत:।
यौवनं चापि सम्प्राप्त: कुमारो वदतां वर:॥ )
अनुवाद
तत्पश्चात, बड़े होकर राजकुमार शांतनु प्रजा की रक्षा करने लगे। वे धर्माचार्यों में श्रेष्ठ थे। धनुर्वेद में उत्कृष्ट प्रवीणता प्राप्त कर उन्होंने वेदों के अध्ययन में उच्च स्थान प्राप्त किया। वक्ताओं में श्रेष्ठ, वे राजकुमार धीरे-धीरे युवावस्था में पहुँचे।
Thereafter, on growing up, Prince Shantanu started protecting the people. He was the best among the religious scholars. He attained a high position in the study of Vedas by acquiring excellent proficiency in Dhanur Veda. The best among the speakers, that prince gradually reached youth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥