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mahabharat 1.97.d3: शक्तिशाली राजा प्रतीप ने उस बालक के लिए आवश्यक अनुष्ठान (संस्कार) करवाए। ब्राह्मण पुरोहित ने वैदिक रीति से उसका जात कर्म आदि संपन्न कराया।   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक d3
 
 
श्लोक  1.97.d3 
(तस्य जातस्य कृत्यानि प्रतीपोऽकारयत् प्रभु:।
जातकर्मादि विप्रेण वेदोक्तै: कर्मभिस्तदा॥
 
 
अनुवाद
शक्तिशाली राजा प्रतीप ने उस बालक के लिए आवश्यक अनुष्ठान (संस्कार) करवाए। ब्राह्मण पुरोहित ने वैदिक रीति से उसका जात कर्म आदि संपन्न कराया।
 
The powerful king Pratipa got the necessary rituals (Sanskar) done for that boy. The Brahmin priest completed his Jaat Karma etc. through Vedic rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)