Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.97.9: हे वरांगने! तुम मेरी दाहिनी जाँघ पर आकर बैठ गई हो। हे कायर! तुम्हें यह जानना चाहिए कि यह मेरे पुत्र, पुत्री और पुत्रवधू का आसन है।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.97.9 
प्राप्य दक्षिणमूरुं मे त्वमाश्लिष्टा वराङ्गने।
अपत्यानां स्नुषाणां च भीरु विद्धॺेतदासनम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे वरांगने! तुम मेरी दाहिनी जाँघ पर आकर बैठ गई हो। हे कायर! तुम्हें यह जानना चाहिए कि यह मेरे पुत्र, पुत्री और पुत्रवधू का आसन है।॥9॥
 
O Varangane! You have come and sat on my right thigh. O coward! You should know that this is the seat of my son, daughter and daughter-in-law.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)