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mahabharat 1.97.8: प्रतीप ने कहा - सुन्दरी! जिस कामना की पूर्ति के लिए तुम मुझसे आग्रह कर रही हो, वह तुमने पूरी कर दी है। यदि मैं तुम्हारे धर्म-विरुद्ध प्रस्ताव को स्वीकार कर लूँ, तो यह धर्म-नाश मेरा भी नाश कर देगा। ॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.97.8 
प्रतीप उवाच
त्वया निवृत्तमेतत् तु यन्मां चोदयसि प्रियम्।
अन्यथा प्रतिपन्नं मां नाशयेद् धर्मविप्लव:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
प्रतीप ने कहा - सुन्दरी! जिस कामना की पूर्ति के लिए तुम मुझसे आग्रह कर रही हो, वह तुमने पूरी कर दी है। यदि मैं तुम्हारे धर्म-विरुद्ध प्रस्ताव को स्वीकार कर लूँ, तो यह धर्म-नाश मेरा भी नाश कर देगा। ॥8॥
 
Pratipa said - Beautiful lady! The desire for which you are urging me to fulfil has been fulfilled by you. If I accept your proposal which is against Dharma, then this destruction of Dharma will destroy me as well. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)