Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.97.27: महाराज जनमेजय! एक दिन उन्होंने एक अत्यंत सुन्दर स्त्री देखी, जिसका शरीर ऐसा शोभायमान था मानो स्वयं लक्ष्मीजी किसी दूसरे शरीर में आ गई हों॥27॥ | mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स कदाचिन्महाराज ददर्श परमां स्त्रियम्।
जाज्वल्यमानां वपुषा साक्षाच्छ्रियमिवापराम्॥ २७॥
अनुवाद
महाराज जनमेजय! एक दिन उन्होंने एक अत्यंत सुन्दर स्त्री देखी, जिसका शरीर ऐसा शोभायमान था मानो स्वयं लक्ष्मीजी किसी दूसरे शरीर में आ गई हों॥27॥
Maharaja Janamejaya! One day he saw an extremely beautiful woman who was radiant with her radiant body as if Goddess Lakshmi herself had come in another body.॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥