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mahabharat 1.97.25: बुद्धिमान राजा शान्तनु देवराज इन्द्र के समान तेजस्वी थे। वे हिंसक पशुओं को मारने के उद्देश्य से वन में विचरण करते थे॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 97: राजा प्रतीपका गंगाको पुत्रवधूके रूपमें स्वीकार करना और शान्तनुका जन्म, राज्याभिषेक तथा गंगासे मिलना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.97.25 
स राजा शान्तनुर्धीमान् देवराजसमद्युति:।
बभूव मृगयाशील: शान्तनुर्वनगोचर:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राजा शान्तनु देवराज इन्द्र के समान तेजस्वी थे। वे हिंसक पशुओं को मारने के उद्देश्य से वन में विचरण करते थे॥25॥
 
The wise king Shantanu was as brilliant as Devraj Indra. They used to roam in the forest with the aim of killing violent animals. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)